ham hi badlenge rah-o-rasm-e-gulistaan yaaro | हम ही बदलेंगे रह-ओ-रस्म-ए-गुलिस्ताँ यारो

  - Ahmad Riyaz
हमहीबदलेंगेरह-ओ-रस्म-ए-गुलिस्ताँयारो
हमसेवाबस्ताहैता'मीर-ए-बहाराँयारो
क़ुरबत-ए-काकुल-ओ-रुख़सारसेजीतंगनहीं
इकज़राचैनतोदेगर्दिश-ए-दौराँयारो
लाखहममरहला-ए-दार-ओ-रसनसेगुज़रे
ज़िंदगीसेहुएफिरभीगुरेज़ाँयारो
इकथकाख़्वाबकिसीनेमेंसुलगताहैअभी
इकदबीयादकिहैनीश-ए-रग-ए-जाँयारो
आमद-ए-सुब्हसेमायूसनहींहैंलेकिन
डसलेतीरगी-ए-शाम-ए-ग़रीबाँयारो
औरकुछदूरकिथोड़ीहैरह-ए-जौर-ओ-सितम
औरकुछदेरकिटूटादर-ए-ज़िंदाँयारो
अपनादुखहोतो'रियाज़'उसकामुदावाकरते
हैंसभीशो'ला-ब-जाँचाक-ए-गरेबाँयारो
  - Ahmad Riyaz
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy