zindagi gham ki aanch sah koi | ज़िंदगी ग़म की आँच सह कोई

  - Ahmad Riyaz
ज़िंदगीग़मकीआँचसहकोई
यूँँजलीयूँँबुझीकिधूलहुई
हमनेभीजश्न-ए-गुलकोदेखाथा
आजतकसोचतेहैंभूलहुई
क्याकरेंअपनीइसतबीअ'तको
आपसेमिलकेभीमलूलहुई
हुस्न-ए-शीरींरहाशिकार-ए-हवस
जेहद-ए-फ़रहादबे-हुसूलहुई
हमहैंवोकुश्तगान-ए-शौक़जिन्हें
सोहबत-ए-दारभीक़ुबूलहुई
लेसँभलज़ुल्मतोंकेरखवाले
अपनाअबरौशनीउसूलहुई
किसकोहँसतामिलाचमनमें'रियाज़'
ग़ुन्चग़ीकिसकीखिलकेफूलहुई
  - Ahmad Riyaz
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