lubhaata hai agarche husn-e-dariya dar raha hooñ main | लुभाता है अगरचे हुस्न-ए-दरिया डर रहा हूँ मैं

  - Ahmad Mushtaq
लुभाताहैअगरचेहुस्न-ए-दरियाडररहाहूँमैं
सबबयेहैकिइकमुद्दतकिनारेपररहाहूँमैं
येझोंकेजिनसेदिलमेंताज़गीआँखोंमेंठंडकहै
इन्हीझोंकोंसेमुरझायाहुआशबभररहाहूँमैं
तिरेआनेकादिनहैतेरेरस्तेमेंबिछानेको
चमकतीधूपमेंसाएइकट्ठेकररहाहूँमैं
कोईकमराहैजिसकेताक़मेंइकशम्अ'जलतीहै
अँधेरीरातहैऔरसाँसलेतेडररहाहूँमैं
मुझेमा'लूमहैअहल-ए-वफ़ापरक्यागुज़रतीहै
समझकरसोचकरतुझसेमोहब्बतकररहाहूँमैं
  - Ahmad Mushtaq
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy