bahut ruk ruk ke chalti hai hawa khaali makaanon men | बहुत रुक रुक के चलती है हवा ख़ाली मकानों में

  - Ahmad Mushtaq
बहुतरुकरुककेचलतीहैहवाख़ालीमकानोंमें
बुझेटुकड़ेपड़ेहैंसिगरेटोंकेराख-दानोंमें
धुएँसेआसमाँकारंगमैलाहोताजाताहै
हरेजंगलबदलतेजारहेहैंकार-ख़ानोंमें
भलीलगतीहैआँखोंकोनएफूलोंकीरंगतभी
पुरानेज़मज़
मेंभीगूँजतेरहतेहैंकानोंमें
वहीगुलशनहैलेकिनवक़्तकीपर्वाज़तोदेखो
कोईताइरनहींपिछलेबरसकेआशियानोंमें
ज़बानोंपरउलझतेदोस्तोंकोकौनसमझाए
मोहब्बतकीज़बाँमुम्ताज़हैसारीज़बानोंमें
  - Ahmad Mushtaq
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