zindagi dehr men sad-rashk-e-iram hone tak | ज़िंदगी दहर में सद-रश्क-ए-इरम होने तक

  - Ahmad Merathi
ज़िंदगीदहरमेंसद-रश्क-ए-इरमहोनेतक
कितनीबे-कैफ़रहीसुब्ह-ए-अलमहोनेतक
अहल-ए-दिलराह-ए-मोहब्बतमेंजानेकितने
मिटगएहैंतिरीइकचश्म-ए-करमहोनेतक
ख़ून-ए-दिलहोगारवाँचश्म-ए-तमन्नासेमिरी
जादा-ए-शौक़मेंअंदाज़ा-ए-ग़महोनेतक
मुद्दतोंबहर-ए-ख़यालातमेंडूबाहीरहा
लौह-ए-दिलपरतिराइकनामरक़महोनेतक
किसीसूरतभीसुकूँदिलकोमुयस्सरहुआ
तेरेदरपरसर-ए-तस्लीमकेख़महोनेतक
हर-नफ़सआलम-ए-तश्कीकमेंगुज़रा'अहमद'
ख़त्मयेमरहला-ए-दैर-ओ-हरमहोनेतक
  - Ahmad Merathi
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