nigaah-e-husn ne jaadu jagaae hain kya kya | निगाह-ए-हुस्न ने जादू जगाए हैं क्या क्या

  - Ahmad Merathi
निगाह-ए-हुस्ननेजादूजगाएहैंक्याक्या
फ़रेबअहल-ए-मोहब्बतनेखाएहैंक्याक्या
किसीनेवा'दा-ए-फ़र्दाकाआसरादेकर
हसीनख़्वाब-ए-तमन्नादिखाएहैंक्याक्या
ज़मानाजिनकोसमझताहैदाग़-ए-महरूमी
मिरीहयातमेंवोरंगलाएहैंक्याक्या
होसकीकभीतकमील-ए-आरज़ूफिरभी
बिसात-ए-ज़ेहनपेख़ाकेबनाएहैंक्याक्या
मता-ए-ग़मकिसेमालूमहैकिहम'अहमद'
जानेपहलू-ए-दिलमेंछुपाएहैंक्याक्या
  - Ahmad Merathi
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