KHaak men kyun mirii dastaar milaai hui hai | ख़ाक में क्यूँँ मिरी दस्तार मिलाई हुई है

  - Ahmad Irfan
ख़ाकमेंक्यूँँमिरीदस्तारमिलाईहुईहै
मैंनेइज़्ज़तबड़ीमुश्किलसेकमाईहुईहै
चाँदकाग़ज़पेबनानाहैअभीएकमुझे
अभीमंज़रमेंफ़क़तझीलबनाईहुईहै
तितलियाँरोज़हीआतीहैंउन्हेंमिलनेको
किसकीख़ुशबूहैजोफूलोंनेचुराईहुईहै
जागनाचाहताहूँदेरतलकसाथतिरे
मेरीआँखोंमेंमगरनींदजोआईहुईहै
आपतन्क़ीदकरेंआपकाहक़हैसाहब
येग़ज़ल'मीर'कोमैंनेतोसुनाईहुईहै
इसकोदीवारपेमैंकैसेलगादूँ'अहमद'
एकतस्वीरजोसीनेसेलगाईहुईहै
  - Ahmad Irfan
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