ab kahaan jaaunga uth kar main yahiin rahne de | अब कहाँ जाऊँगा उठ कर मैं यहीं रहने दे

  - Ahmad Irfan
अबकहाँजाऊँगाउठकरमैंयहींरहनेदे
वहशत-ए-ख़ाना-बदोशीतूकहींरहनेदे
होगईशाहकोअबमातकिमैंकहतारहा
अरेरहनेदेपियादेकोवहींरहनेदे
लेकेजासकताहैतूसरसेमिराचर्ख़-ए-कुहन
परमिरेपैरोंतलेमेरीज़मींरहनेदे
तर्क-ए-हिजरतकाइरादाभीतोकरसकताहै
कौनठहरेगायहाँदिलकेमकींरहनेदे
कज-कुलाहीमुझेतख़्त-नशीनीसेग़रज़
सर-बसरख़ाकहूँऔरख़ाक-नशींरहनेदे
हमकिदरवेशहैंऔरइश्क़सेमतलबहैहमें
हुस्नकोअपनीजगहचीं-ब-जबींरहनेदे
इश्क़फिरऔरपरी-ज़ादसेअहमद-'इरफ़ान'
देवपत्थरकाबनादेकहींरहनेदे
  - Ahmad Irfan
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