jab bhi dil khol ke roye honge | जब भी दिल खोल के रोए होंगे

  - Ahmad Faraz
जबभीदिलखोलकेरोएहोंगे
लोगआरामसेसोएहोंगे
बाज़औक़ातब-मजबूरी-ए-दिल
हमतोक्याआपभीरोएहोंगे
सुब्हतकदस्त-ए-सबानेक्याक्या
फूलकाँटोंमेंपिरोएहोंगे
वोसफ़ीनेजिन्हेंतूफ़ाँमिले
ना-ख़ुदाओंनेडुबोएहोंगे
रातभरहँसतेहुएतारोंने
उनकेआरिज़भीभिगोएहोंगे
क्याअजबहैवोमिलेभीहों'फ़राज़'
हमकिसीध्यानमेंखोएहोंगे
  - Ahmad Faraz
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