phir usii rahguzar par shaayad | फिर उसी रहगुज़ार पर शायद

  - Ahmad Faraz
फिरउसीरहगुज़ारपरशायद
हमकभीमिलसकेंमगरशायद
जिनकेहममुंतज़िररहेउनको
मिलगएऔरहम-सफ़रशायद
जान-पहचानसेभीक्याहोगा
फिरभीदोस्तग़ौरकरशायद
अज्नबिय्यतकीधुँदछटजाए
चमकउठ्ठेतिरीनज़रशायद
ज़िंदगीभरलहूरुलाएगी
याद-ए-यारान-ए-बे-ख़बरशायद
जोभीबिछड़ेवोकबमिलेहैं'फ़राज़'
फिरभीतूइंतिज़ारकरशायद
  - Ahmad Faraz
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy