barson ke baad dekha ik shaKHs dilruba sa | बरसों के बाद देखा इक शख़्स दिलरुबा सा

  - Ahmad Faraz
बरसोंकेबाददेखाइकशख़्सदिलरुबासा
अबज़ेहनमेंनहींहैपरनामथाभलासा
अबरूखिंचेखिंचेसेआँखेंझुकीझुकीसी
बातेंरुकीरुकीसीलहजाथकाथकासा
अल्फ़ाज़थेकिजुगनूआवाज़केसफ़रमें
बनजाएजंगलोंमेंजिसतरहरास्तासा
ख़्वाबोंमेंख़्वाबउसकेयादोंमेंयादउसकी
नींदोंमेंखुलगयाहोजैसेकिरतजगासा
पहलेभीलोगआएकितनेहीज़िंदगीमें
वोहरतरहसेलेकिनऔरोंसेथाजुदासा
कुछयेकिमुद्दतोंसेहमभीनहींथेरोए
कुछज़हरमेंखुलाथाअहबाबकादिलासा
फिरयूँँहुआकिसावनआँखोंमेंबसेथे
फिरयूँँहुआकिजैसेदिलभीथाआबलासा
अबसचकहेंतोयारोंहमकोख़बरनहींथी
बनजाएगाक़यामतइकवाक़िआज़रासा
तेवरथेबे-रुख़ीकेअंदाज़दोस्तीके
वोअजनबीथालेकिनलगताथाआशनासा
हमदश्तथेकिदरियाहमज़हरथेकिअमृत
ना-हक़थाज़ोमहमकोजबवोनहींथाप्यासा
हमनेभीउसकोदेखाकलशामइत्तेफ़ाक़न
अपनाभीहालहैअबलोगोंफ़राज़कासा
  - Ahmad Faraz
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