abhii kuchh aur karish | अभी कुछ और करिश्में ग़ज़ल के देखते हैं

  - Ahmad Faraz
अभीकुछऔरकरिश्मेंग़ज़लकेदेखतेहैं
'फ़राज़'अबज़रालहजाबदलकेदेखतेहैं
जुदाइयाँतोमुक़द्दरहैंफिरभीजान-ए-सफ़र
कुछऔरदूरज़रासाथचलकेदेखतेहैं
रह-ए-वफ़ामेंहरीफ़-ए-ख़िरामकोईतोहो
सोअपनेआपसेआगेनिकलकेदेखतेहैं
तूसामनेहैतोफिरक्यूँँयक़ींनहींआता
येबारबारजोआँखोंकोमलकेदेखतेहैं
येकौनलोगहैंमौजूदतेरीमहफ़िलमें
जोलालचोंसेतुझेमुझकोजलकेदेखतेहैं
येक़ुर्बक्याहैकियक-जाँहुएदूररहे
हज़ारएकहीक़ालिबमेंढलकेदेखतेहैं
तुझकोमातहुईहैमुझकोमातहुई
सोअबकेदोनोंहीचालेंबदलकेदेखतेहैं
येकौनहैसर-ए-साहिलकिडूबनेवाले
समुंदरोंकीतहोंसेउछलकेदेखतेहैं
अभीतलकतोकुंदनहुएराखहुए
हमअपनीआगमेंहररोज़जलकेदेखतेहैं
बहुतदिनोंसेनहींहैकुछउसकीख़ैर-ख़बर
चलो'फ़राज़'कोयारचलकेदेखतेहैं
  - Ahmad Faraz
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