vo kisi aur samt jaate rahe | वो किसी और सम्त जाते रहे

  - Ahmad Aqeel
वोकिसीऔरसम्तजातेरहे
हमफ़क़तअपनादिलजलातेरहे
उसकीअंगड़ाईक्याक़यामतथी
हमनएज़ाविएबनातेरहे
हरतरफ़रातकानज़ाराथा
दिलबनाकरदियाजलातेरहे
उसकेलहजेसेलगरहाथाकिहम
पत्थरोंकोग़ज़लसुनातेरहे
हमफ़क़तज़ाहिदान-ए-ख़ुश्कनहीं
बातबिगड़ीहुईबनातेरहे
उसकीआँखेंथींआमसीआँखें
हम-सुख़नयूँँहीडगमगातेरहे
दुनियारोतीरहीमगरहमलोग
क़हक़होंमेंकसकछुपातेरहे
  - Ahmad Aqeel
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