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Ahamd Raza Khan Raza
raah pur-khaar hai kya hona hai
raah pur-khaar hai kya hona hai | राह पुर-ख़ार है क्या होना है
- Ahamd Raza Khan Raza
राह
पुर-ख़ार
है
क्या
होना
है
पाँव
अफ़गार
है
क्या
होना
है
काम
ज़िंदाँ
के
किए
और
हमें
शौक़-ए-गुलज़ार
है
क्या
होना
है
जान
हलकान
हुई
जाती
है
बार
सा
बार
है
क्या
होना
है
पार
जाना
है
नहीं
मिलती
नाव
ज़ोर
पर
धार
है
क्या
होना
है
रौशनी
की
हमें
आदत
और
घर
तीरा-ओ-तार
है
क्या
होना
है
बीच
में
आग
का
दरिया
हाएल
क़स्द
उस
पार
है
क्या
होना
है
साथ
वालों
ने
यहीं
छोड़
दिया
बे-कसी
यार
है
क्या
होना
है
आख़िरी
दीद
है
आओ
मिल
लें
रंज
बे-कार
है
क्या
होना
है
दिल
हमें
तुम
से
लगाना
ही
न
था
अब
सफ़र
बार
है
क्या
होना
है
क्यूँँ
'रज़ा'
कुढ़ते
हो
हँसते
उट्ठो
जब
वो
ग़फ़्फ़ार
है
क्या
होना
है
- Ahamd Raza Khan Raza
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आज
पैवंद
की
ज़रूरत
है
ये
सज़ा
है
रफ़ू
न
करने
की
Fahmi Badayuni
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जन्नत
में
आ
गया
था
किसी
अप्सरा
पे
दिल
जिसकी
सज़ा-ए-मौत
में
दुनिया
मिली
मुझे
Ankit Maurya
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ख़्वाबों
की
ता'बीर
बनी
है
इक
लड़की
मेरे
मन
की
हीर
बनी
है
इक
लड़की
दुनिया
तुझ
को
कब
का
छोड़
चुके
होते
पैरों
की
ज़ंजीर
बनी
है
इक
लड़की
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Vikas Sahaj
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ज़िंदगी
से
बड़ी
सज़ा
ही
नहीं
और
क्या
जुर्म
है
पता
ही
नहीं
Krishna Bihari Noor
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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हर
गाम
तेरे
इश्क़
का
इकरार
है
मैं
हूँ
ज़ंजीर
है
ज़ंजीर
की
झनकार
है
मैं
हूँ
ऐ
ज़ीस्त
जो
सब
सेे
बड़ी
फ़नकार
है
तू
है
और
तुझ
सेे
बड़ा
वो
जो
अदाकार
है
मैं
हूँ
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Obaid Azam Azmi
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हमीं
तक
रह
गया
क़िस्सा
हमारा
किसी
ने
ख़त
नहीं
खोला
हमारा
मु'आफ़ी
और
इतनी
सी
ख़ता
पर
सज़ा
से
काम
चल
जाता
हमारा
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Shariq Kaifi
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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तेरी
आँखों
के
लिए
इतनी
सज़ा
काफ़ी
है
आज
की
रात
मुझे
ख़्वाब
में
रोता
हुआ
देख
Abhishek shukla
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सज़ा
कितनी
बड़ी
है
गाँव
से
बाहर
निकलने
की
मैं
मिट्टी
गूँधता
था
अब
डबलरोटी
बनाता
हूँ
Munawwar Rana
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