kya kar rahe ho zulm karo raah raah ka | क्या कर रहे हो ज़ुल्म करो राह राह का

  - Agha Shayar Qazalbash
क्याकररहेहोज़ुल्मकरोराहराहका
कहतेहैंबे-जिगरहैबड़ातीरआहका
यूँँरौंगटेलरज़तेहैंपूछेंगेरोज़-ए-हश्र
क्यूँँएकदिनभीख़ौफ़आयागुनाहका
हालतपेमेरीउनकेभीआँसूनिकलपड़े
देखागयायासमेंआलमनिगाहका
किसराकाताक़काबेकेबुतमुँहकेबलगिरे
शोहरासुनाजोअशहदो-अन-ला-इलाहका
'शाइर'अजीबरंगसेगुज़रीहैअपनीउम्र
दुनियामेंनामभीसुनाख़ैर-ख़्वाहका
  - Agha Shayar Qazalbash
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