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Afzal Sultanpuri
pahle to vo KHud ko haara paata hai
pahle to vo KHud ko haara paata hai | पहले तो वो ख़ुद को हारा पाता है
- Afzal Sultanpuri
पहले
तो
वो
ख़ुद
को
हारा
पाता
है
दरिया
में
फिर
कश्ती
किनारा
पाता
है
- Afzal Sultanpuri
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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मैं
एक
ठहरा
हुआ
पुल,
तू
बहता
दरिया
है
तुझे
मिलूँगा
तो
फिर
टूट
कर
मिलूँगा
मैं
Subhan Asad
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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अगर
फ़ुर्सत
मिले
पानी
की
तहरीरों
को
पढ़
लेना
हर
इक
दरिया
हज़ारों
साल
का
अफ़्साना
लिखता
है
Bashir Badr
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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अब
तो
दरिया
सूख
चुका
है
अब
तो
इस
शम्मा
को
बुझा
दो
Siddharth Saaz
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आँख
आँसू
को
ऐसे
रस्ता
देती
है
जैसे
रेत
गुज़रने
दरिया
देती
है
कोई
भी
उसको
जीत
नहीं
पाया
अब
तक
वैसे
वो
हर
एक
को
मौक़ा
देती
है
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Kafeel Rana
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अभी
वो
लौटकर
आया
नहीं
काबे
कि
ज़ानिब
से
मिला
था
गांँव
के
हद
पर
करी
बातें
कवाकिब
से
Afzal Sultanpuri
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मौत
का
जो
नाम
सुनकर
डर
गए
डर
गए
वो
आज
अपने
घर
गए
छोड़
देता
किस
तरह
से
यार
को
साथ
में
हम
यार
के
अक्सर
गए
था
तुम्हारे
ही
भरोसे
ख़ैर
हो
कब
हमारे
पास
चारा-गर
गए
नींद
की
हम
गोलियाँ
खाने
लगे
फिर
पता
चलता
किसे
वो
मर
गए
जिस
जनाज़े
से
लिपटकर
रो
रहे
हाँ
वही
अफ़ज़ल
कभी
दर
दर
गए
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Afzal Sultanpuri
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सोचता
ही
रहा
कुछ
भी
कह
न
सका
बात
दिल
की
थी
दिल
में
दबी
रह
गई
दर्द
सीने
में
काँटों
सा
चुभता
रहा
ऐसा
क्या
था
कि
जिस
की
कमी
रह
गई
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Afzal Sultanpuri
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पढ़ा
था
जो
किताबों
में
वही
सब
कुछ
हुआ
भी
है
बहुत
ढूंँढा
नहीं
पाया
कहीं
पर
तो
ख़ुदा
भी
है
नहीं
मिलता
पता
था
ये
मगर
दिल
की
रही
ख़्वाहिश
मिले
मुझको
कहीं
पर
तो
कहूँँ
कोई
फ़िदा
भी
है
दु'आ
में
भी
तुम्हें
मांँगा
इबादत
में
किया
गिर्या
मोहब्बत
है
अगर
नुक़सान
तो
इस
में
नफ़ा
भी
है
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Afzal Sultanpuri
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हमारी
ईद
तो
होनी
नहीं
है
नहीं
आए
अगर
इस
मरतबा
तुम
Afzal Sultanpuri
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