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Afzal Sultanpuri
sochta hi raha kuchh bhi kah na sakaa
sochta hi raha kuchh bhi kah na sakaa | सोचता ही रहा कुछ भी कह न सका
- Afzal Sultanpuri
सोचता
ही
रहा
कुछ
भी
कह
न
सका
बात
दिल
की
थी
दिल
में
दबी
रह
गई
दर्द
सीने
में
काँटों
सा
चुभता
रहा
ऐसा
क्या
था
कि
जिस
की
कमी
रह
गई
- Afzal Sultanpuri
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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जो
चुप-चाप
रहती
थी
दीवार
पर
वो
तस्वीर
बातें
बनाने
लगी
Adil Mansuri
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प्यार
मुहब्बत
बाद
की
बातें
जान
कभी
ये
सोचा
है
किसने
तेरा
साथ
दिया
था
कौन
नशे
में
ख़त्म
हुआ
Vikram Gaur Vairagi
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जब
मसअले
न
हल
हो
सकें
बात-चीत
से
फिर
जंग
ही
लड़ो
कि
ज़माना
ख़राब
है
shaan manral
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इक
लड़की
से
बात
करो
तो
लगता
है
इस
दुनिया
को
छोड़
के
भी
इक
दुनिया
है
Shadab Asghar
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ज़रा
सा
झूठ
ही
कह
दो
मेरे
बिन
तुम
अधूरे
हो
तुम्हारा
क्या
बिगड़ता
है
ज़रा
सी
बात
कहने
में
Parveen Shakir
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तुम
मुख़ातिब
भी
हो
क़रीब
भी
हो
तुम
को
देखें
कि
तुम
से
बात
करें
Firaq Gorakhpuri
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जिस
की
बातों
के
फ़साने
लिक्खे
उस
ने
तो
कुछ
न
कहा
था
शायद
Ada Jafarey
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बूढ़ी
बोझल
सूखी
आँखें
देख
रही
हैं
हैरत
से
कच्ची
उम्र
के
लड़कों
ने
कुछ
ऐसी
बातें
लिक्खी
हैं
Shadab Javed
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जहान
भर
में
न
हो
मुयस्सर
जो
कोई
शाना,
हमें
बताना
नहीं
मिले
गर
कोई
ठिकाना
तो
लौट
आना,
हमें
बताना
कुछ
ऐसी
बातें
जो
अनकही
हों,
मगर
वो
अंदर
से
खा
रही
हों
लगे
किसी
को
बताना
है
पर
नहीं
बताना,
हमें
बताना
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Vikram Gaur Vairagi
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थे
यहाँ
जितने
सयाने
आ
गए
देख
तेरे
सब
दीवाने
आ
गए
Afzal Sultanpuri
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बुतों
से
मांगने
पर
क्या
मिला
है
नसीहत
हैं
जुलैखा
की
दुआएं
Afzal Sultanpuri
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ज़मीं
पर
जब
हुकूमत
हो
रही
थी
रिसालत
की
क़यादत
हो
रही
थी
नफ़ा
नुकसान
समझा
जा
रहा
है
मोहब्बत
में
तिजारत
हो
रही
थी
सफ़र
होता
मुकम्मल
किस
तरह
से
मुसलसल
जब
ख़िलाफ़त
हो
रही
थी
क़बीला
लुट
गया
कोई
न
आया
कहाँ
थे
जब
अज़ीयत
हो
रही
थी
लगा
के
आग
ख़ुश
शैतान
इतना
कहा
मेरी
हिमायत
हो
रही
थी
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Afzal Sultanpuri
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ख़ुद
के
जो
काम
आ
नहीं
सकते
मेरे
क्या
ख़ाक
काम
आएँगे
Afzal Sultanpuri
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दीन
दुनिया
में
बेच
खाएँगे
बाद
उसके
कहाँ
को
जाएँगे
कैसी
सूरत
बना
के
रक्खी
है
शक्ल
किसको
भला
दिखाएँगे
आँख
से
ख़ून
ही
निकलता
है
तेरा
मातम
हमीं
मनाएँगे
जन्मदिन
ये
तुम्हें
मुबारक
हो
दास्ताँ
हम
तुम्हें
सुनाएँगे
आख़िरी
मरतबा
मिलो
जानाँ
शहर
तेरे
कभी
न
आएँगे
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Afzal Sultanpuri
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