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Afzal Sultanpuri
zameen par jab hukoomat ho rahi thii
zameen par jab hukoomat ho rahi thii | ज़मीं पर जब हुकूमत हो रही थी
- Afzal Sultanpuri
ज़मीं
पर
जब
हुकूमत
हो
रही
थी
रिसालत
की
क़यादत
हो
रही
थी
नफ़ा
नुकसान
समझा
जा
रहा
है
मोहब्बत
में
तिजारत
हो
रही
थी
सफ़र
होता
मुकम्मल
किस
तरह
से
मुसलसल
जब
ख़िलाफ़त
हो
रही
थी
क़बीला
लुट
गया
कोई
न
आया
कहाँ
थे
जब
अज़ीयत
हो
रही
थी
लगा
के
आग
ख़ुश
शैतान
इतना
कहा
मेरी
हिमायत
हो
रही
थी
- Afzal Sultanpuri
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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हासिल
नहीं
हुआ
है
मोहब्बत
में
कुछ
मगर
इतना
तो
है
कि
ख़ाक
उड़ाना
तो
आ
गया
Amaan Haider
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इश्क़
का
था
खेल
केवल
दौड़
का
बन
के
बल्लेबाज़
शामिल
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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किसी
ने
प्यार
जताया
जता
के
छोड़
दिया
हवा
में
मुझको
उठाया
उठा
के
छोड़
दिया
किसे
सिखा
रहे
हो
इश्क़
तुम
नए
लड़के
ये
राग
हमने
मियाँ
गा
बजा
के
छोड़
दिया
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Vishnu virat
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हमारे
बाद
तेरे
इश्क़
में
नए
लड़के
बदन
तो
चू
मेंगे
ज़ुल्फ़ें
नहीं
सँवारेंगे
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Vikram Gaur Vairagi
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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मोहब्बत
में
नहीं
है
फ़र्क़
जीने
और
मरने
का
उसी
को
देख
कर
जीते
हैं
जिस
काफ़िर
पे
दम
निकले
Mirza Ghalib
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तुम्हीं
से
प्यार
मुझको
इसलिए
है
ज़माना
आज़मा
कर
आ
गया
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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चाहता
तो
था
उधर
मैं
भी
नज़र
कर
देखना
आइना
जब
देखना
तुम
सज
सँवर
कर
देखना
उस
गली
से
आ
रहा
हूँ
बस
ज़रा
भर
देख
कर
मैं
यही
तो
चाहता
हूँ
फिर
गुज़र
कर
देखना
कर
रहा
था
घाव
दिल
पर
साथ
में
ख़ामोश
था
मैं
बताता
हूँ
तुम्हें
तुम
उस
पे
मर
कर
देखना
अब
सुकूँ
जो
ढूंढते
हो
यार
तुम
ऐसा
करो
देखना
फिर
तुम
कभी
अफ़ज़ल
सुधर
कर
देखना
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Afzal Sultanpuri
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आज
वो
भी
तड़प
रहा
होगा
आग
उस
में
भड़क
रहा
होगा
तुम
दुबारा
तलाशती
राहें
यार
कोई
सड़क
रहा
होगा
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Afzal Sultanpuri
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हमारे
पैर
में
छाले
पड़े
हैं
यहाँ
खाने
को
फिर
लाले
पड़े
हैं
Afzal Sultanpuri
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कभी
थे
क़ैदखाने
में
कभी
आज़ाद
बैठे
हैं,
कि
तुम
सेे
इश्क़
करके
हम
यहाँ
बर्बाद
बैठे
हैं
हमारी
आँख
का
तारा
हमारे
दिल
कि
वो
धड़कन
इधर
शीरी
तड़पती
है
उधर
फ़रहाद
बैठे
हैं
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Afzal Sultanpuri
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न
क़ाबे
में
रहेंगे
न
काशी
में
रहेंगे
परेशाँ
ही
जिएँगे
उदासी
में
रहेंगे
Afzal Sultanpuri
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