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Afzal Sultanpuri
chahta to tha udhar main bhi nazar kar dekhna
chahta to tha udhar main bhi nazar kar dekhna | चाहता तो था उधर मैं भी नज़र कर देखना
- Afzal Sultanpuri
चाहता
तो
था
उधर
मैं
भी
नज़र
कर
देखना
आइना
जब
देखना
तुम
सज
सँवर
कर
देखना
उस
गली
से
आ
रहा
हूँ
बस
ज़रा
भर
देख
कर
मैं
यही
तो
चाहता
हूँ
फिर
गुज़र
कर
देखना
कर
रहा
था
घाव
दिल
पर
साथ
में
ख़ामोश
था
मैं
बताता
हूँ
तुम्हें
तुम
उस
पे
मर
कर
देखना
अब
सुकूँ
जो
ढूंढते
हो
यार
तुम
ऐसा
करो
देखना
फिर
तुम
कभी
अफ़ज़ल
सुधर
कर
देखना
- Afzal Sultanpuri
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न
करो
बहस
हार
जाओगी
हुस्न
इतनी
बड़ी
दलील
नहीं
Jaun Elia
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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हमारे
सीने
पे
उँगलियों
से
तुम
अपना
चेहरा
बना
रहे
थे
तुम्हें
कुछ
उस
की
ख़बर
नहीं
थी
हमारे
दिल
में
जो
चल
रहा
था
Nadim Nadeem
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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हम
तोहफ़े
में
घड़ियाँ
तो
दे
देते
हैं
एक
दूजे
को
वक़्त
नहीं
दे
पाते
हैं
आँखें
ब्लैक
एंड
व्हाइट
हैं
तो
फिर
इन
में
रंग
बिरंगे
ख़्वाब
कहाँ
से
आते
हैं?
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Fareeha Naqvi
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मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
Siddharth Saaz
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साक़ी
कुछ
आज
तुझ
को
ख़बर
है
बसंत
की
हर
सू
बहार
पेश-ए-नज़र
है
बसंत
की
Ufuq Lakhnavi
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क्या
और
बताऊँ
कोई
उम्मीद
नहीं
थी
मौका
तो
था
मिलने
का
मगर
ईद
नहीं
थी
चाहा
तो
यही
था
कि
मुझे
छोड़
न
जाए
हालात
थे
ऐसे
कोई
तजदीद
नहीं
थी
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Afzal Sultanpuri
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आँखें
बता
रही
हैं
मोहब्बत
तुझे
भी
है
चाहत
बता
रही
है
ज़रूरत
तुझे
भी
है
इक
रोज़
इस
अज़ाब
से
बाहर
निकल
गए
उल्फ़त
बता
रही
है
अज़ीयत
तुझे
भी
है
हम
दोस्ती
का
हाथ
बढ़ाते
रहे
मगर
फिर
ये
ख़बर
हुआ
कि
अदावत
तुझे
भी
है
गर्दन
को
चूमने
का
इरादा
किया
था
मैं
फिर
होंठ
ने
कहा
कि
इनायत
तुझे
भी
है
दो
चार
दाँव
खेल
के
मालूम
ये
हुआ
बिल्कुल
हमारे
जैसे
महारत
तुझे
भी
है
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Afzal Sultanpuri
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देखना
इस
तरह
से
चाहूँगा
अपनी
दुल्हन
बना
के
लाऊँगा
वो
समझती
रही
मुझे
पागल
मैं
ही
पागल
उसे
बनाऊँगा
क्या
हुआ
छोड़
क्यूँ
रही
मुझको
बोला
शौहर
कि
मैं
बताऊँगा
भूलने
का
वो
कर
गई
वा'दा
याद
मैं
बार-बार
आऊँगा
आँख
से
ख़ून
बह
रहा
जिस
में
ऐसी
तस्वीर
मैं
बनाऊँगा
या
तो
दरिया
के
पार
आऊँगा
या
तो
दरिया
में
डूब
जाऊँगा
जिस
तरह
आपने
रुलाया
है
एक
दिन
आपको
रुलाऊँगा
याद
रखना
ये
बात
'अफ़ज़ल'
की
मर
के
इक
दिन
तुम्हें
दिखाऊँगा
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Afzal Sultanpuri
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हमें
पागल
किया
था
चीज़
ने
जो
अरे
बेशक
वही
था
तिल
तुम्हारा
Afzal Sultanpuri
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क्या
करूँँ
इस
ख़्वाब
का
जो
आँख
से
निकला
नहीं
लाठियाँ
मारी
मगर
पत्थर
कभी
पिघला
नहीं
Afzal Sultanpuri
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