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Afzal Sultanpuri
munaafiq aur mushrik men kahii afzal nahin koi
munaafiq aur mushrik men kahii afzal nahin koi | मुनाफ़िक और मुशरिक में कहीं अफ़ज़ल नहीं कोई
- Afzal Sultanpuri
मुनाफ़िक
और
मुशरिक
में
कहीं
अफ़ज़ल
नहीं
कोई
यहाँँ
तो
शहर
हैं
लेकिन
इधर
जंगल
नहीं
कोई
- Afzal Sultanpuri
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हमारी
मुस्कुराहट
लाज़िमी
है
कि
हम
उनकी
गली
से
आ
रहे
हैं
Bhaskar Shukla
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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जो
सुनते
हैं
कि
तिरे
शहर
में
दसहरा
है
हम
अपने
घर
में
दिवाली
सजाने
लगते
हैं
Jamuna Parsad Rahi
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सदियों
से
किनारे
पे
खड़ा
सूख
रहा
है
इस
शहर
को
दरिया
में
गिरा
देना
चाहिए
Mohammad Alvi
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उसको
शहर
की
सड़कें
अच्छी
लगती
हैं
मेरा
क्या
है
मुझको
चलना
पड़ता
है
Kafeel Rana
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तेरी
आवाज़
को
इस
शहर
की
लहरें
तरसती
हैं
ग़लत
नंबर
मिलाता
हूँ
तो
पहरों
बात
होती
है
Ghulam Mohammad Qasir
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कोई
हाथ
भी
न
मिलाएगा
जो
गले
मिलोगे
तपाक
से
ये
नए
मिज़ाज
का
शहर
है
ज़रा
फ़ासले
से
मिला
करो
Bashir Badr
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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नहीं
हो
तुम
तो
ऐसा
लग
रहा
है
कि
जैसे
शहर
में
कर्फ़्यूँँ
लगा
है
Fahmi Badayuni
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नक़्शा
उठा
के
और
कोई
शहर
देखिए
इस
शहर
में
तो
सब
से
मुलाक़ात
हो
गई
Nida Fazli
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कुछ
नया
इंतिज़ाम
करते
हैं
इश्क़
सा
नेक
काम
करते
हैं
जानकर
दुख
हुआ
मोहब्बत
में
लोग
ऐसे
भी
काम
करते
हैं
तेरी
आदत
मुझे
लगी
ऐसी
ख़ुद
को
सारा
तमाम
करते
हैं
हुस्न
ज़ालिम,
अदा
अज़िय्यत
है
सारे
झुक
कर
सलाम
करते
हैं
तीरगी
ख़त्म
हो
गई
दिल
की
शे'र
का
इख़्तिताम
करते
हैं
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Afzal Sultanpuri
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माजरा
क्या
है
हमें
कुछ
भी
समझ
आया
नहीं
ढूँढकर
थक
ही
गया
लेकिन
हमें
पाया
नहीं
Afzal Sultanpuri
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मौत
का
जो
नाम
सुनकर
डर
गए
डर
गए
वो
आज
अपने
घर
गए
छोड़
देता
किस
तरह
से
यार
को
साथ
में
हम
यार
के
अक्सर
गए
था
तुम्हारे
ही
भरोसे
ख़ैर
हो
कब
हमारे
पास
चारा-गर
गए
नींद
की
हम
गोलियाँ
खाने
लगे
फिर
पता
चलता
किसे
वो
मर
गए
जिस
जनाज़े
से
लिपटकर
रो
रहे
हाँ
वही
अफ़ज़ल
कभी
दर
दर
गए
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Afzal Sultanpuri
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आख़िरत
का
तुम्हें
कहाँँ
डर
है
कह
दिया
कब्र
ने
तिरा
घर
है
Afzal Sultanpuri
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मतलबी
लोग
मतलबी
दुनिया
अपने
ही
बोझ
में
दबी
दुनिया
Afzal Sultanpuri
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