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Afzal Sultanpuri
kuchh naya intizaam karte hain
kuchh naya intizaam karte hain | कुछ नया इंतिज़ाम करते हैं
- Afzal Sultanpuri
कुछ
नया
इंतिज़ाम
करते
हैं
इश्क़
सा
नेक
काम
करते
हैं
जानकर
दुख
हुआ
मोहब्बत
में
लोग
ऐसे
भी
काम
करते
हैं
तेरी
आदत
मुझे
लगी
ऐसी
ख़ुद
को
सारा
तमाम
करते
हैं
हुस्न
ज़ालिम,
अदा
अज़िय्यत
है
सारे
झुक
कर
सलाम
करते
हैं
तीरगी
ख़त्म
हो
गई
दिल
की
शे'र
का
इख़्तिताम
करते
हैं
- Afzal Sultanpuri
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अपनी
हस्ती
का
भी
इंसान
को
इरफ़ांन
हुआ
ख़ाक
फिर
ख़ाक
थी
औक़ात
से
आगे
न
बढ़ी
Shakeel Badayuni
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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इंसाँ
की
ख़्वाहिशों
की
कोई
इंतिहा
नहीं
दो
गज़
ज़मीं
भी
चाहिए
दो
गज़
कफ़न
के
बाद
Kaifi Azmi
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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वो
लोग
हम
ही
थे
मुहब्बत
में
जो
फिर
आगे
हुए
वो
लोग
हम
ही
थे
मियाँ
जो
दूर
भागे
जिस्म
से
Kartik tripathi
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क्या
लोग
हैं
कि
दिल
की
गिरह
खोलते
नहीं
आँखों
से
देखते
हैं
मगर
बोलते
नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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कान्हा
होंगे
लोग
वहाँ
के
राधा
होंगी
बालाएँ
प्यार
की
बंसी
बजती
होगी
हर
समय
हर
ठाओं
रे
Ghaus Siwani
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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हमें
मालूम
नहीं
था
ये
मुसीबत
है
हमें
ये
इल्म
नहीं
था
की
रिवायत
है
Afzal Sultanpuri
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ज़िंदगी
को
अज़ाब
कर
लेना
मौत
से
भी
ख़राब
कर
लेना
Afzal Sultanpuri
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उन्हीं
ख़्वाबों
में
जी
लेना
उन्हीं
ख़्वाबों
से
डर
जाना
हमारे
पास
मत
आना
भले
तुम
यार
मर
जाना
Afzal Sultanpuri
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क्या
और
बताऊँ
कोई
उम्मीद
नहीं
थी
मौका
तो
था
मिलने
का
मगर
ईद
नहीं
थी
चाहा
तो
यही
था
कि
मुझे
छोड़
न
जाए
हालात
थे
ऐसे
कोई
तजदीद
नहीं
थी
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Afzal Sultanpuri
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रो
पड़े
तोड़कर
क़सम
दोनों
फिर
मिलेंगे
किसी
जनम
दोनों
एक
तस्वीर
थी
हमारी
भी
इश्क़
करते
हुए
सनम
दोनों
वो
महीना
जुलाई
दस
तारीख़
पास
बैठे
हुए
थे
हम
दोनों
सारी
दुनिया
सलाम
करती
फिर
साथ
लेकर
चलें
अलम
दोनों
एक
दिन
दिख
गई
कमी
मुझ
में
फिर
लगे
मिलने
और
कम
दोनों
मैं
कहाँ
रह
गया
कहानी
में
इस
सफ़र
को
करें
खतम
दोनों
सब
पता
है
सही
ग़लत
अफ़ज़ल
क्यूँ
करें
इश्क़
पे
सितम
दोनों
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Afzal Sultanpuri
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