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Afzal Sultanpuri
ha
ha | हमें मालूम नहीं था ये मुसीबत है
- Afzal Sultanpuri
हमें
मालूम
नहीं
था
ये
मुसीबत
है
हमें
ये
इल्म
नहीं
था
की
रिवायत
है
- Afzal Sultanpuri
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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इक
और
किताब
ख़त्म
की
फिर
उस
को
फाड़
कर
काग़ज़
का
इक
जहाज़
बनाया
ख़ुशी
हुई
Ameer Imam
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बच्चों
के
छोटे
हाथों
को
चाँद
सितारे
छूने
दो
चार
किताबें
पढ़
कर
ये
भी
हम
जैसे
हो
जाएँगे
Nida Fazli
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हमें
पढ़ाओ
न
रिश्तों
की
कोई
और
किताब
पढ़ी
है
बाप
के
चेहरे
की
झुर्रियाँ
हम
ने
Meraj Faizabadi
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बे-गिनती
बोसे
लेंगे
रुख़-ए-दिल-पसंद
के
आशिक़
तिरे
पढ़े
नहीं
इल्म-ए-हिसाब
को
Haidar Ali Aatish
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बेटियाँ
बाप
की
आँखों
में
छुपे
ख़्वाब
को
पहचानती
हैं
और
कोई
दूसरा
इस
ख़्वाब
को
पढ़
ले
तो
बुरा
मानती
हैं
Iftikhar Arif
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नाम
लिख
लिख
के
तिरा
फूल
बनाने
वाला
आज
फिर
शबनमीं
आँखों
से
वरक़
धोता
है
Ghulam Mohammad Qasir
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काग़ज़
में
दब
के
मर
गए
कीड़े
किताब
के
दीवाना
बे-पढ़े-लिखे
मशहूर
हो
गया
Bashir Badr
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ये
इल्म
का
सौदा
ये
रिसाले
ये
किताबें
इक
शख़्स
की
यादों
को
भुलाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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एक
आवाज़
पे
आ
जाती
है
दौड़ी
दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान
नहीं
देखती
है
दोस्ती
दोस्ती
होती
है
तुम्हें
इल्म
नहीं
दोस्ती
फ़ाइदा
नुक़सान
नहीं
देखती
है
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Aadil Rasheed
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तेरी
बिगड़ी
तबीअत
लग
रही
है
हमें
उसकी
बदौलत
लग
रही
है
परेशाँ
हो
गया
हूँ
जिस
तरह
मैं
मुझे
तेरी
शरारत
लग
रही
है
तजुर्बे
से
तुम्हें
बतला
रहा
हूँ
हमें
तो
ये
मोहब्बत
लग
रही
है
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Afzal Sultanpuri
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हमें
पैग़ाम
भेजा
था
किसी
क़ासिद
के
हाथों
से
कहा
जाकर
बता
देना
उन्हें
हम
भूल
बैठे
हैं
Afzal Sultanpuri
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ख़ूब
है
दिल
के
इस
दहकने
में
इश्क़
करने
में
फिर
बहकने
में
दिल
परिंदा
कि
जिस
में
चाहत
हो
नाम
लेकर
तिरा
चहकने
में
तुमने
जब
से
गले
लगाया
है
यार
पागल
हुआ
महकने
में
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Afzal Sultanpuri
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बहुत
ही
बढ़
गया
ख़र्चा
तुम्हारा
हमें
अब
साथ
रहना
ही
नहीं
है
Afzal Sultanpuri
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दिल
चोरी
का
काम
ग़लत
है
'अफ़ज़ल'
तेरा
नाम
ग़लत
है
इश्क़,
मोहब्बत
तुम
रहने
दो
इसका
तो
अंजाम
ग़लत
है
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Afzal Sultanpuri
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