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Afzal Sultanpuri
aakhirat ka tumhein kahaan dar hai
aakhirat ka tumhein kahaan dar hai | आख़िरत का तुम्हें कहाँँ डर है
- Afzal Sultanpuri
आख़िरत
का
तुम्हें
कहाँँ
डर
है
कह
दिया
कब्र
ने
तिरा
घर
है
- Afzal Sultanpuri
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ज़िंदगी
भर
वो
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
एक
तस्वीर
जो
हँसते
हुए
खिंचवाई
थी
Yasir Khan
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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तन्हाई
ये
तंज
करे
है
तन्हा
क्यूँ
है
यार
कहाँ
है
आगे
पीछे
चलने
वाले
Vishal Singh Tabish
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ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
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भूचाल
की
धमकी
का
अगर
डर
है
तो
लोगों
इन
कच्चे
मकानों
को
गिरा
क्यूँ
नहीं
देते
Gyan Prakash Vivek
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लिपट
जाते
हैं
वो
बिजली
के
डर
से
इलाही
ये
घटा
दो
दिन
तो
बरसे
Dagh Dehlvi
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अज़ल
से
ले
कर
के
आज
तक
मैं
कभी
भी
तन्हा
नहीं
रहा
हूँ
कभी
थे
तुम
तो,
कभी
थी
दुनिया,
कभी
ये
ग़ज़लें,
कभी
उदासी
Ankit Maurya
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वो
कभी
आग़ाज़
कर
सकते
नहीं
ख़ौफ़
लगता
है
जिन्हें
अंजाम
से
Siraj Faisal Khan
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अपने
ख़्वाबों
पे
शे'र
लिख
देना
या
सराबों
पे
शे'र
लिख
देना
यार
पर्दा
अज़ीज
है
उनको
बा-हिजाबों
पे
शे'र
लिख
देना
कौन
है
दोस्त
कौन
है
दुश्मन
बे-नक़ाबों
पे
शे'र
लिख
देना
वो
कली
हैं
गुलाब
की
अफ़ज़ल
उन
गुलाबों
पे
शे'र
लिख
देना
ख़ाक
में
मिल
गई
मिरी
ख़्वाहिश
सारे
बाबों
पे
शे'र
लिख
देना
कब
तलक
और
चुप
रहूँगा
मैं
इंक़िलाबों
पे
शे'र
लिख
देना
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Afzal Sultanpuri
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हो
सके
तो
आप
बस
इतना
फ़राहम
कीजिए
मर
गए
जो
हम
हमारा
फिर
न
मातम
कीजिए
क़ैद
में
रखना
बहुत
आसान
है
अफ़ज़ल
मगर
छोड़कर
पहले
परिंदा
फिर
मुनज़्ज़म
कीजिए
कौन
सा
है
इश्क़
पहला
रो
रहे
जिसके
लिए
मान
वरना
ज़िंदगी
अपनी
जहन्नम
कीजिए
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Afzal Sultanpuri
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ज़िंदगी
ने
यही
सिखाया
है
धूप
में
छाँव
काम
आया
है
आरज़ू
ख़त्म
हो
गई
मेरी
फोन
पर
कौन
हो
बुलाया
है
थी
तमन्ना
गले
लगा
लो
तुम
और
फिर
मौत
ने
लगाया
है
क्या
यही
प्यार
की
हक़ीक़त
है
प्यार
को
यार
किसने
पाया
है
और
भी
दोस्त
हैं
हमारे
पर
तुमको
अपना
सनम
बनाया
है
इस
ग़ज़ल
को
तुम्हारी
हाजत
है
इसने
तो
नूर
तुम
सेे
पाया
है
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Afzal Sultanpuri
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प्यार
मेरा
ख़रीद
लेगा
वो
यार
उसका
अमीर
है
मुर्शिद
Afzal Sultanpuri
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सारे
ख़्वाब
उसी
के
थे
मेरी
तो
बस
आँखें
थीं
मुझ
में
सुब्ह
उसी
से
थे
पहले
अँधेरी
रातें
थी
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Afzal Sultanpuri
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