main ne dil-e-be-taab pe jo jabr kiya hai | मैं ने दिल-ए-बे-ताब पे जो जब्र किया है

  - Afzal Parvez
मैंनेदिल-ए-बे-ताबपेजोजब्रकियाहै
ख़ूँहोकेमेरीआँखोंसेअबछूटबहाहै
जिसकोकिसीआज़रनेहैपत्थरसेतराशा
अबशूमी-ए-तक़दीरसेवोमेराख़ुदाहै
उसकेसितम-ओ-जौरकाएहसासकिसेहो
उसशोख़कीसूरतहीबड़ीहोश-रुबाहै
मुझबेकस-ओ-आवाराकीफिरगईशामत
सुनताहूँकिबस्तीमेंकहींक़त्लहुआहै
तुमउनकोसज़ाक्यूँँनहींदेतेकिजिन्होंने
मुजरिमकाज़मीरऔरसुकूँलूटलियाहै
अबदा'वा-ए-इंसाफ़कीऔक़ातखुलेगी
ख़ुदशैख़मिरेशहरकामुख़्तारबनाहै
  - Afzal Parvez
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