gard ude ya koi aandhi hi chale | गर्द उड़े या कोई आँधी ही चले

  - Afzal Parvez
गर्दउड़ेयाकोईआँधीहीचले
येउमसतोकिसीउनवानटले
अंगपरज़ख़्मलिएख़ाकमले
आनबैठेहैंतिरेमहलतले
अपनाघरशहर-ए-ख़मोशाँसाहै
कौनआएगायहाँशामढले
दिल-ए-परवानापेक्यागुज़रेगी
जबतलकधूपबुझेशम्अ'जले
रूपकीजोतहैकालाजादू
इकछलावाकिफ़रिश्तोंकोछले
दलदलोंमेंभीकँवलखिलतेहैं
नख़्ल-ए-उम्मीदबहर-तौरभले
अपनेहीरैन-बसेरोंकीतरफ़
लौटआएहैंसभीशामढले
मय-कदेमेंतोनशाबटताहै
कौनयाँजाँचेबुरेऔरभले
रौशनीदेखकेचुँधियाजाएँ
जोअँधेरोंमेंबढ़ेऔरपले
ख़ारतोसैफ़बनेगागुलकी
येभलेहीकिसीगुलचींकोखले
रातबाक़ीहैअभीतो'परवेज़'
बादासर-जोशरहेदौरचले
  - Afzal Parvez
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