guzarti hai jo ham par raftagaan ham kuchh nahin kahte | गुज़रती है जो हम पर रफ़्तगाँ हम कुछ नहीं कहते

  - Afzal Gohar
गुज़रतीहैजोहमपररफ़्तगाँहमकुछनहींकहते
तुम्हेंकरसुनाएँगेयहाँहमकुछनहींकरते
हमारीख़ामुशीकेभीकईमफ़्हूमहोतेहैं
वहाँभीकुछतोकहतेहैंजहाँहमकुछनहींकहते
ज़मींकेदुखसुनातेहैंज़मींकीबातकरतेहैं
कभीअपनेलिएआसमाँहमकुछनहींकहते
कभीदिलसेगुज़रतीहोकहींआँखोंसेबहतीहो
तुझेफिरभीकभीजू-ए-रवाँहमकुछनहींकहते
अंधेरेसेमज़ाआताहैकुछतकरारकरनेमें
तुझेतोचराग़-ए-नीम-जाँहमकुछनहींकहते
  - Afzal Gohar
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