ye kis ke naqsh-e-paa se aisa silsila charaaghh tha | ये किस के नक़्श-ए-पास ऐसा सिलसिला चराग़ था

  - Afzal Gohar
येकिसकेनक़्श-ए-पासऐसासिलसिलाचराग़था
किमुझकोयूँँलगाकिसारारास्ताचराग़था
ज़रासीदेरमेंहीख़द्द-ओ-ख़ाल-ए-शबबदलगए
शक्लकोईचाँदथीआइनाचराग़था
सवालयेहैरौशनीवहाँपेरोकदीगई
जहाँपेहरकिसीकेहाथमेंनयाचराग़था
बहुतसेहाथसुब्हकीदु'आहीकरतेरहगए
मैंपुर-उमीदथाकिमेराहौसलाचराग़था
कहींकहींसेझड़रहीथीभुर्भुरीसीरौशनी
हवा-ए-शबकेग़ममेंकैसामुब्तलाचराग़था
ज़रासीक्याहवाचलीकिलोगसटपटागए
वहीगँवादियागयाजोरातकाचराग़था
  - Afzal Gohar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy