tamaam bojh kahaan khaak-daan pe padta hai | तमाम बोझ कहाँ ख़ाक-दाँ पे पड़ता है

  - Afzal Gohar
तमामबोझकहाँख़ाक-दाँपेपड़ताहै
कभीकभीतोक़दमआसमाँपेपड़ताहै
मुझेतोपेड़कीछाँवनेरोकरक्खाहै
वगर्नाहाथतोअब्र-ए-रवाँपेपड़ताहै
येतीरयूँँहीनहींदुश्मनोंतलकजाते
बदनकासाराखिचावकमाँपेपड़ताहै
तुझेज़मीनकेबारेमेंइल्महैतोबता
इसआसमानकासायाकहाँपेपड़ताहै
इधरमैंपाँवउठाताहूँऔरउधर'गौहर'
ग़ुबारसासफ़-ए-सय्यारगाँपेपड़ताहै
  - Afzal Gohar
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