koi na harf-e-naved-o-khabar kaha us ne | कोई न हर्फ़-ए-नवेद-ओ-ख़बर कहा उस ने

  - Afzal Ahmad Syed
कोईहर्फ़-ए-नवेद-ओ-ख़बरकहाउसने
वहीफ़साना-ए-अशुफ़्ता-तरकहाउसने
शिराकत-ए-ख़स-ओ-शोलाहैकारोबार-ए-जुनूँ
ज़ियाँ-कदेमेंकिसअंजामपरकहाउसने
उसेभीनाज़-ए-ग़लत-कर्दा-ए-तग़ाफ़ुलथा
किख़्वाबख़ेमा-फ़रोशीकोघरकहाउसने
तमामलोगजिसेआसमानकहतेहैं
अगरकहातोउसेबालपरकहाउसने
उसेअजबथाग़ुरूर-ए-शगुफ़्त-ए-रुख़्सारी
बहार-ए-गुलकोबहुतबे-हुनरकहाउसने
येगुलहैंऔरयेसितारेहैंऔरयेमैंहूँ
बसएकदिनमुझेतालीमकरकहाउसने
मिरीमिसालथीसफ़्फ़ाकी-ए-तमन्नामें
सुपुर्दगीमेंमुझेक़त्लकरकहाउसने
मैंआफ़्ताब-ए-क़यामतथासोतुलूहुआ
हज़ारमतला-ए-ना-साज़-तरकहाउसने
  - Afzal Ahmad Syed
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy