hua hai qat'a mira dast-e-mojazah tujh pe | हुआ है क़त्अ मिरा दस्त-ए-मोजज़ा तुझ पे

  - Afzal Ahmad Syed
हुआहैक़त्अमिरादस्त-ए-मोजज़ातुझपे
गियाह-ए-ज़र्दबहुतहैयेसानेहातुझपे
मैंचाहताहूँमुझेमशअलोंकेसाथजला
कुशादा-तरहैअगरख़ेमा-ए-हवातुझपे
मैंअपनेकुश्ताचराग़ोंकापुलबनादेता
किसीभीशाममिरीनहर-ए-पेश-पातुझपे
येकोईकमहैकिरेग-ए-शीशा-ए-साअत
उगारहाहूँमैंइकनख़्ल-ए-आईनातुझपे
किअजनबीहूँबहुतसाया-ए-शजरकेलिए
सोरेग-ए-ज़र्दमेंहोताहूँरू-नुमातुझपे
पुकारतीहैमुझेख़ाक-ए-ख़िश्त-ए-पैवस्ता
येनस्बहोनेकाहैख़त्मसिलसिलातुझपे
  - Afzal Ahmad Syed
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