dua ki raakh pe marmar ka itr-daan us ka | दु'आ की राख पे मरमर का इत्र-दाँ उस का

  - Afzal Ahmad Syed
दु'आकीराखपेमरमरकाइत्र-दाँउसका
गज़ीदगीकेलिएदस्त-ए-मेहरबाँउसका
गहनकेरोज़वोदाग़ीहुईजबींउसकी
शब-ए-शिकस्तवहीजिस्मबे-अमाँउसका
कमंद-ए-ग़ैरमेंसबअस्पगोस्फ़ंदउसके
नशेब-ए-ख़ाकमेंख़ुफ़्ता-सितारा-दाँउसका
तन्नुर-ए-यख़मेंठिठुरतेहैंख़्वाबख़ूँउसके
लिखाहैनामसर-ए-लौह-ए-रफ़्तगाँउसका
चुनीहुईहैंतह-ए-ख़िश्तउँगलियाँउसकी
खुलाहुआहैपस-ए-रेगबादबाँउसका
वोइकचराग़हैदीवार-ए-ख़स्तगीपेरुका
हवाहोतेज़तोहरहालमेंज़ियाँउसका
उसीसेधूपहैअम्बार-ए-धुँदहैरू-पोश
गिरफ़्त-ए-ख़्वाबसेबरसरहैकारवाँउसका
  - Afzal Ahmad Syed
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