ik shaam ye saffaaq o bad-andesh jala de | इक शाम ये सफ़्फ़ाक ओ बद-अंदेश जला दे

  - Afzal Ahmad Syed
इकशामयेसफ़्फ़ाकबद-अंदेशजलादे
शायदकिमुझेशोला-ए-दर-पेशजलादे
इसदिलकोकिसीदस्त-ए-अदा-संजमेंरखना
मुमकिनहैयेमीज़ान-ए-कम-ओ-बेशजलादे
किसक़हत-ए-खोर-ओ-ख़्वाबमेंमैंमोलकेलाया
वोनानकिजोकास-ए-दरवेशजलादे
रुख़्सतकोहैदरिया-ए-दिल-आराम-ए-रवानी
जोकुछहैसफ़ीनेकेपसपेशजलादे
शायदकिकभीख़ाक-ए-कम-आमेज़बलाले
औरमुझकोपस-ए-लौह-ए-कम-अँदेशजलादे
  - Afzal Ahmad Syed
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