makaan-e-khwaab men jungle ki baas rahne lagii | मकान-ए-ख़्वाब में जंगल की बास रहने लगी

  - Afzaal Naveed
मकान-ए-ख़्वाबमेंजंगलकीबासरहनेलगी
कोईआयातोज़ीनोंपेघासरहनेलगी
तिरेवजूदकाजबसेलिबासरहनेलगी
लिएदिएहुएमुझसेकपासरहनेलगी
येऔरबातअनोखीसीप्यासरहनेलगी
मिरीज़बानपेउसकीमिठासरहनेलगी
झलकथीयाकोईख़ुशबू-ए-ख़द्द-ओ-ख़ालथीवो
चलीगईतोमिरेआसपासरहनेलगी
गयाहुजूमलिएबाज़-दीदनक़्श-ए-क़दम
हवा-ए-राहगुज़रबद-हवासेरहनेलगी
ज़राए'जोथेमुयस्सरहुएग़ुबार-ए-शनाख़्त
दरूँसेचश्म-ए-दरूँना-शनासरहनेलगी
अभीग़ुबारउतराथासाँसकाअंदर
उतरनेकीपस-ए-ज़िंदाँभड़ासरहनेलगी
उतारफेंकदियाजोथाजिस्म-ए-बोसीदा
सितारोंकीकोईउतरनलिबासरहनेलगी
ज़्यादाज़ोरलगानेसेकुछहोसकता
सोआएरोज़कीहलचलहीरासरहनेलगी
लहदनेदामन-ए-यख़-बस्ताखोलकररक्खा
बदनमेंगर्मी-ए-ख़ौफ़-ओ-हिरासरहनेलगी
जानेअंधेकुओंकीवोतिश्नगीथीक्या
हरएकआँखमेंजोबे-लिबासरहनेलगी
बिगाड़जिससेहोपैदाकोईबिगाड़नहीं
सोमो'जिज़ेकीमिरेदिलकोआसरहनेलगी
मुग़ाइरतसेभरीतीरगीकेबीच'नवेद'
इकअंदरूनीरमक़रू-शनासरहनेलगी
  - Afzaal Naveed
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