dhanak men sar the tiri shaal ke churaaye hue | धनक में सर थे तिरी शाल के चुराए हुए

  - Afzaal Naveed
धनकमेंसरथेतिरीशालकेचुराएहुए
मैंसुरमईथासर-ए-शामगुनगुनाएहुए
समयकीलहरतिरेबाज़ुओंमेंलेआई
हवामेंबहरतिरीसाँसमेंसमाएहुए
तमानियतसेउठानामुहालथामशअ'ल
मैंदेखनेलगाथाउसकोसरझुकाएहुए
सहरकीगूँजसेआवाज़ा-ए-जमालहुआ
सोजागतारहाअतराफ़कोजगाएहुए
थाबाग़बाग़शुआ'-ए-सफ़ेदसेशबभर
गुलाब-ए-अबयज़-ए-रुख़थाझलकदिखाएहुए
ख़ुमार-ए-क़ुर्मुज़ीसेआतिशींथासाग़र-ए-ख़्वाब
भराथामुँहतिरेजामुनसेबादालाएहुए
अनारफूटतेथेनींदकेसमुंदरमें
वोदेखताथामुझेफुलझड़ीलगाएहुए
दिखारहाथामिरेपानियोंसेशहर-ए-विसाल
कोईचराग़साअंदरथाझिलमिलाएहुए
हवाकेझोंकोंमेंजाकरउसेमैंपीआया
रहावोदेरतलकजाम-ए-मयबनाएहुए
येतेरीमेरीजुदाईकानक़्शहैबादल
बरसरहाहैब-यक-वक़्तवाँभीछाएहुए
मुताबक़तसेरहातब्अकेअलावको
कहींजलाएहुएऔरकहींबुझाएहुए
हिनाईहाथसेलगकरसजीकुछऔर'नवेद'
मिरीअँगूठीथाअर्सेसेवोगुमाएहुए
  - Afzaal Naveed
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy