dasht tareek tha aur KHvaab tha kaala miraa | दश्त तारीक था और ख़्वाब था काला मेरा

  - Afzaal Naveed
दश्ततारीकथाऔरख़्वाबथाकालामेरा
रौशनीदेतारहाकानकाबालामेरा
काटनाथामुझेकोह-ए-शब-ए-ग़ुर्बतलेकिन
टूटकरगिरतारहाराहमेंभालामेरा
तुझकोमा'लूमथीचाक-गरेबानीमिरी
तूनेइसदश्तमेंक्यूँनामनिकालामेरा
आतिशींरखतीहैयाँगर्मी-ए-रफ़्तारमुझे
हूँमह-ए-ख़ाक-नशींगर्दहैहालामेरा
ला-मकाँनेमुझेफेंकाहैमकाँकीहदमें
किससेपड़ताहैयहाँदेखिएपालामेरा
मंज़िल-ए-इश्क़ख़ाक-ए-शब-ए-हिज्राँमेंमिली
जादा-ए-रंजमेंखिंचतारहानालामेरा
दस्त-ए-शफ़्फ़ाफ़पेलिखताहैमिरानामकोई
शाख़-ए-सरसब्ज़पेखुलताहैउजालामेरा
मुझकोगरकार-ए-मोहब्बतमेंज़रादेरहुई
गयाकरनेकोईऔरइज़ालामेरा
पारकरजाएयेशायदकिसीदिनजू-ए-ख़ाक
जिस्मकोचाहिएकुछऔरसँभालामेरा
शहर-ए-मौजूदधुआँहैमिरेबुझनेसे'नवेद'
शहर-ए-नाबूदमेंरहताहैउजालामेरा
  - Afzaal Naveed
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy