baagh kya kya shajar dikhaate hain | बाग़ क्या क्या शजर दिखाते हैं

  - Afzaal Naveed
बाग़क्याक्याशजरदिखातेहैं
हमभीअपनेसमरदिखातेहैं
तुझेबे-ख़बरदिखातेहैं
हालत-ए-नामा-बरदिखातेहैं
कुछमज़ाहिरहैंजोनगरमेंहमें
दूसराहीनगरदिखातेहैं
रूह-ए-मुतलक़मेंइश्क़जज़्बहुआ
अर्शकाकामकरदिखातेहैं
ख़ुदतोपहुँचेहुएहैंमंज़िलपर
पाँवकोदर-ब-दरदिखातेहैं
हमकोमतलूबख़ुदसेजानाहै
वाँनहींहैंजिधरदिखातेहैं
कितनाफैलावरक़्स-ए-आबमेंहै
अपनेसरसेउतरदिखातेहैं
दिखातेहैंतुझकोअपनाआप
औरदिलखोलकरदिखातेहैं
करातेहैंसैर-ए-दिलतुझको
तुझेबहर-ओ-बरदिखातेहैं
जबदिखानीहोरौनक़-ए-रफ़्तार
वोयहाँसेगुज़रदिखातेहैं
उठतेपानीसीलहरलेनेसेवो
सरसेपातककमरदिखातेहैं
कौनसूरजहमारीआँखोंको
ख़्वाब-ए-शाम-ओ-सहरदिखातेहैं
राह-ए-दुश्वारजबनहींकटती
वोकोईबातकरदिखातेहैं
मतउठाअबकोईनईदीवार
हमतुझेअपनासरदिखातेहैं
चाँदनीक्याकहींपेबिखरेगी
तेरेदरपरबिखरदिखातेहैं
देखइकतंगी-ए-क़यामत-ख़ेज़
हमतुझेअपनाघरदिखातेहैं
बाम-ए-अफ़्लाकसेउतारहमें
हाथपरदीपधरदिखातेहैं
अस्लरुख़कानहींहैउश्र-ए-अशीर
जोहमेंचारा-गरदिखातेहैं
कुछतोमज़मूँबने-बनाएहैं
औरकुछबाँधकरदिखातेहैं
ग़म्ज़ा-हा-ए-पस-ए-नज़्ज़ारा'नवेद'
हमकोराह-ए-सफ़रदिखातेहैं
  - Afzaal Naveed
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