tira jab kamaal-e-nazar dekhte hain | तिरा जब कमाल-ए-नज़र देखते हैं

  - Prashant Kumar
तिराजबकमाल-ए-नज़रदेखतेहैं
शराबोंमेंभीहमअसरदेखतेहैं
तुझीकोइधरसेउधरदेखतेहैं
दरीचेपरकरकेगुज़रदेखतेहैं
क़यामतक़यामतनज़ररहीहै
उठाकरजिधरभीनज़रदेखतेहैं
तिरेज़िक्रपरअंजुमनमेंसुख़न-वर
सुनाकरख़ुदअपनीख़बरदेखतेहैं
अगरहाथरखदेनबीकेभीतनमें
कईसालतकफिरअसरदेखतेहैं
ख़ुदासोचतेहैंमोहब्बतकीशायद
तिराहरतरफ़सेफिगरदेखतेहैं
  - Prashant Kumar
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