qarz zindagi bhar ka utaar aaya | क़र्ज़ ज़िंदगी भर का उतार आया

  - Prashant Kumar
क़र्ज़ज़िंदगीभरकाउतारआया
हुस्नपरतुम्हारेजबनिखारआया
सबग़लतनज़रसेदेखतेथेतुमको
मैंउधरगयासबकोनिखारआया
क्याकरूँँक़यामतकापतानहींथा
मैंजिधरगयापर्दाउघारआया
मैंवफ़ाकेक़ाबिलतोनहींरहाअब
एकहम-नशींकोफिरभीप्यारआया
यारतूकिकमरेमेंपड़ाहुआहै
औरमैंतुझेसबमेंपुकारआया
  - Prashant Kumar
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