deta nahin hai saath bure vaqt men koii | देता नहीं है साथ बुरे वक़्त में कोई

  - Prashant Kumar
देतानहींहैसाथबुरेवक़्तमेंकोई
दुश्मनख़ुदाहोदोस्तयापरिवारअजनबी
जितनीभीमौजलेनाहैलेलोअभीसभी
मिलतीनहींकिसीकोदुबारायेज़िंदगी
देखोअबएकसाँसभीबाक़ीनहींबची
कितनीदफ़ालगेगीमोहब्बतमेंहथकड़ी
चलनाहैख़ुदहीराहमेंकाँटेंहोंयाहोंफूल
फिरक्यूँँकिसीसेमाँगनारातोंमेंफुलझड़ी
मिलतीनहींफिरउसकोज़मानतभीचाहकर
लगतीहैजबकिसीकोमोहब्बतमेंहथकड़ी
जबनामरहाहैतोहक़कीलड़ाईलड़
तोहमतकीज़िंदगीसेतोबेहतरहैख़ुद-कुशी
  - Prashant Kumar
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