mauzoon kii tarah khulkar dadba se nikalti hain | मौज़ों की तरह खुलकर दड़बास निकलती हैं

  - Prashant Kumar
मौज़ोंकीतरहखुलकरदड़बासनिकलतीहैं
हमजामलगातेहैंवोआगउगलतीहैं
अँगड़ाईतुम्हारीतोक़ारूनख़ज़ानाहै
जबहाथउठातेहोमोहरेंसीनिकलतीहैं
अफ़्लाकज़मींछोड़ोपरियाँभीमुलाज़िमहैं
नहलातीतोहैंहीफिरकपड़ेभीबदलतीहैं
जिसरोज़अगरजाऊँघरहाथपसारेमैं
फिरख़ूबझगड़तीहैंमुश्किलसेबहलतीहैं
हमबाम-ए-फ़लकउनकोजिसरोज़बुलातेहैं
तोख़ूबसतातीहैंआवाज़बदलतीहैं
हमग़मकेअँधेरेमेंजबघरसेनिकलतेहैं
गर्दिशकीतरहख़ुशियाँफिरसाथमेंचलतीहैं
  - Prashant Kumar
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