अंगूरी बदन आतिश यौवन ज़ुल्फ़ों की झलक फिर वैसी ही

  - Prashant Kumar
अंगूरीबदनआतिशयौवनज़ुल्फ़ोंकीझलकफिरवैसीही
चलनेकाहुनरनायाबतिराफ़ित्नेकीचमकफिरवैसीही
रुख़सारतिराहैमौज-ए-बलाऔरहोंटतिरेसूरजकीकिरन
जोशीलाबदनआफ़तचितवनऊपरसेफुदकफिरवैसीही
वोपहलीदफ़ाजबतुमसेेमिलेतुमख़ूबलिपटकेरोएथे
अबशहरसहैंजानेकोमगरहोंटोंपेसिसकफिरवैसीही
पातालसेढूँढ़निकालेगाजोहमनेछोड़ाशहरतिरा
हमभूलेनहींग़ुस्सातेराआँखोंमेंखटकफिरवैसीही
खेतोंकीकगरपरबैठकेहमचीज़इकदूजेकोखिलातेथे
हमआजबिछड़नेकोहैंमगरहोंटोंपेगज़कफिरवैसीही
क्याहालबनायाहैऐसासदियोंसेजैसेदेखाहो
मैंसामनेरोज़आताहूँमगरआँखोंमेंकसकफिरवैसीही
वोरातसितारोंवालीहोगालोंपरतेरेलालीहो
सरजाँघपेतेरीरक्खाहोसीनेकीलपकफिरवैसीही
  - Prashant Kumar
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