pindaar-e-mohabbat ki nigaahon men rakha kar | पिंदार-ए-मोहब्बत कि निगाहों में रखा कर

  - Prashant Kumar
पिंदार-ए-मोहब्बतकिनिगाहोंमेंरखाकर
ख़ुदकोकभीग़ैरकीबाँहोंमेंरखाकर
तूकाँचकापैकरतोमैंपत्थरकासनमहूँ
तशरीफ़ऐसेमिरीराहोंमेंरखाकर
लेजाएयेचाँदकहींफिरसेचुराकर
तूशाम-ओ-सहरमुझकोनिगाहोंमेंरखाकर
कोईकोईघरमेंतिरेदेखहीलेगा
तस्वीरउठाकरमिरीराहोंमेंरखाकर
अहवालकिसीकोभीबतानानहींअच्छा
हरराज़मिरामेरेगुनाहोंमेंरखाकर
मैंहीतुझेहरबारमोहब्बतमेंमनाता
तूथोड़ीबहुतशर्मनिगाहोंमेंरखाकर
ज़ालिमहैज़मानातुझेजीनेनहींदेगा
मुझकोबहुतदेरपनाहोंमेंरखाकर
  - Prashant Kumar
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