mire mahboob mohabbat ke zamaane maange | मिरे महबूब मोहब्बत के ज़माने माँगें

  - Prashant Kumar
मिरेमहबूबमोहब्बतकेज़मानेमाँगें
वहीबीतेहुएलम्होंकेख़ज़ानेमाँगें
नईचीज़ोंमेंकशिशअबकहाँपहलेजैसी
अबकेमौतेंभीबदनख़ासपुरानेमाँगें
बातआईहैमोहब्बतमेंनिशानीकीसो
मिरेमहबूबमिरेज़ख़्मसुहानेमाँगें
पहलेसाज़िशरचेंइकपलमेंमिटानेकीसब
फिरयहीलोगमिरेसाथज़मानेमाँगें
अरेहमसोचरहेप्यारहुआहैलेकिन
वोक़लममाँगेंतोलिखनेकेबहानेमाँगें
वोअगरसाथनिभानेकीक़समखाएँतो
हाथपरहाथरखेंऔरज़मानेमाँगें
यहीकहतेहैंसदाइश्क़नहींहैतुझसेे
फिरभीतस्वीरमिरीकरकेबहानेमाँगें
हमयहीसोचरहेहैंकिमोहब्बतहुईहै
औरवोफूलकिगजरेकेबहानेमाँगें
  - Prashant Kumar
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