क्यूँँ मुझ सेे किसी को भी यहाँ प्यार नहीं है

  - Prashant Kumar
क्यूँँमुझसेेकिसीकोभीयहाँप्यारनहींहै
कोईभीमिरेदिलकाख़रीदारनहींहै
हरशख़्सनेमुझकोनज़रअंदाज़कियाहै
माफिकमिरेलगताहैयेसंसारनहींहै
बैठेहैंहरआँगनमेंमोहब्बतकेहकीमऔर
कहतेहैंकोईइश्क़काबीमारनहींहै
पासतिरेहुस्नकाकुछमोलचुकादूँ
मानायेतिरेरूपकाबाज़ारनहींहै
गुब्बारातोफूलेगाचलोलिखनहींसकते
दुनियामेंकोईचीज़किबेकारनहींहै
  - Prashant Kumar
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