mohabbat ko mohra banaya gaya hai | मोहब्बत को मोहरा बनाया गया है

  - Prashant Kumar
मोहब्बतकोमोहराबनायागयाहै
कोईजालफिरसेसजायागयाहै
जोतूफ़ानख़ालीजगहमेंउठाथा
मिरेझोपड़ेमेंबुलायागयाहै
मिरेप्यारकाथाजोडिब्बापुराना
उसेफाड़करफिरजलायागयाहै
हँसायाथासारेज़मानेकोहमने
हमारेलबोंकोरुलायागयाहै
कईसालमेंआयारोनेकामौसम
इनआँखोंकोफिरभीहँसायागयाहै
उठाजबकभीबोलनेकेलिएसच
तोहरबारमुझकोडरायागयाहै
मिराजिस्मतोदुश्मनोंकेलिएथा
मगरदोस्तोंपरलुटायागयाहै
परीलाएगीख़्वाबमेंएकरोटी
वोबच्चायेकहकरसुलायागयाहै
वोऐसेतोघरसेआयाकभीभी
किअर्ज़ीसेसबकीभगायागयाहै
  - Prashant Kumar
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