kabhi to aankh ka jaadu kabhi ye baal ki KHushboo | कभी तो आँख का जादू कभी ये बाल की ख़ुशबू

  - Prashant Kumar
कभीतोआँखकाजादूकभीयेबालकीख़ुशबू
कभीबेहोशकरदेतीहैमुझकोशालकीख़ुशबू
लबतक़रीरमेंमौजेंबहारबाग़'आलमकी
सुनाहैदूरतकजातीहैतेरेक़ालकीख़ुशबू
चलेजाएँगेजख़्माँपाक़ख़ुदहोतेहुएमेरे
लुटादेतूअगरमुझपेउसीरूमालकीख़ुशबू
तिरेहोंटोंकाक्याकहनादवामेरेमरज़कीहैं
अगरबीमारकरतीहैतोतेरेगालकीख़ुशबू
कहींकोईमुसाफ़िररातमेंरस्ताभटकजाए
तोउसकोघरतलकपहुँचाकेआतीचालकीख़ुशबू
फटीसीएकचादरथीमुझेजिस
मेंसुलायाथा
उसीचादरसेआतीहैपिताकेहालकीख़ुशबू
  - Prashant Kumar
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