jab naqaab-e-rukh par uske aftaab rakh diya | जब नक़ाब-ए-रुख़ पर उसके आफ़ताब रख दिया

  - Prashant Kumar
जबनक़ाब-ए-रुख़परउसकेआफ़ताबरखदिया
यूँँलगाकिचाँदपरकोईगुलाबरखदिया
मैंनेकब,कहाँपेकितनेबोसेरातमेंलिए
उसनेखोलकरकेआजसबहिसाबरखदिया
आँख,कान,गाल,होंटसबमयकुहनलगे
हमनेहुस्नकाभीनामइकशराबरखदिया
मौतकीकगारपरहूँजबउसेख़बरहुई
आजहीउठाकेताक़मेंहिजाबरखदिया
जुर्मकेख़िलाफ़बसक़लमउठाईथी'प्रशांत'
मुंसिफ़ोंनेमेरानामहीकसाबरखदिया
  - Prashant Kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy