pahli pahli dafa aankh unse mili rukh se parda hata muskuraane lage | पहली पहली दफ़ा आँख उन सेे मिली रुख़ से पर्दा हटा मुस्कुराने लगे

  - Prashant Kumar
पहलीपहलीदफ़ाआँखउनसेेमिलीरुख़सेपर्दाहटामुस्कुरानेलगे
हालऐसाहुआएकहीबारमेंदिलकेअरमाँबिखरकरठिकानेलगे
जबउन्हेंरातपीताहुआदिखगयावोतोनंगेहीपाँवगएमय-कदे
डटगएसाक़ियापरनज़रतानकरउल्टीसीधीमुझेभीसुनानेलगे
चाँदनीरातशर्मारहीहैउधरऔरइधरउठगएवोमुझेदेखकर
पहलेतोआँखसेख़ूबइशारेकिएबादमेंफिरअकेलेबुलानेलगे
मैंभीअंजानथायारउनकेलिएवोभीअंजानथेयारमेरेलिए
इश्क़केनामसेरुकगयाथामगरजोड़करहाथमुझकोमनानेलगे
सालभरसेकहाँथेबताओसनमएकहीबातकीरटलगातेरहे
बे-तहाशालिपटकरकेरोनेलगेऔरक़िस्सेविरहकेसुनानेलगे
  - Prashant Kumar
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