gair aangan men ja rahe ho kyun | ग़ैर आँगन में जा रहे हो क्यूँँ

  - Prashant Kumar
ग़ैरआँगनमेंजारहेहोक्यूँँ
हमेंपागलबनारहेहोक्यूँँ
दूरियाँअबबढ़ारहेहोक्यूँँ
फ़ासलाअबमिटारहेहोक्यूँँ
ग़ैरदूल्हाबनारहेहोक्यूँँ
लालजोड़ासजारहेहोक्यूँँ
क्याकमीहैमिरीमोहब्बतमें
मुझसेेदामनछुड़ारहेहोक्यूँँ
जबकिसीनेनहींबुलायाहै
अपनीमर्ज़ीसेरहेहोक्यूँँ
जबसभीलोगबे-वफ़ाहैंतो
दिलसभीसेलगारहेहोक्यूँँ
यारकैसेहोक़यामततुम
दिनमेंछतपरनहारहेहोक्यूँँ
  - Prashant Kumar
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