chore jawaan hokar har baat taalte hain | छोरे जवान होकर हर बात टालते हैं

  - Prashant Kumar
छोरेजवानहोकरहरबातटालतेहैं
धरताक़मेंकिताबेंगलियोंमेंहालतेहैं
अबक्याबताएँतुमकोवोइतनेना-समझहैं
उपलेकीबोरसीमेंज़मज़मखँगालतेहैं
बचपनकीउम्रमेंहैपचपनकाकार-नामा
रुकतीनहींहैचुन्नीख़ंजरउछालतेहैं
हमकोमिटानेवालेख़ुदकाख़यालकरतू
रूह-ए-रवाँमेंतकहमबारूदपालतेहैं
ऐसेनहींमिटेगानामनिशाँहमारा
येमौतकेफ़रिश्तेउँगलीपेहालतेहैं
  - Prashant Kumar
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